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इस दिन उपवास करने से तृप्त हो जाते हैं सभी देवी-देवता और पशु-पक्षी

भगवान श्री हरि को समर्पित मार्गशीर्ष मास में अमावस्या का विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष माह की अमावस्या तिथि पर व्रत रखने से ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, सूर्य, अग्नि, पक्षी, पशु सहित देवी देवताओं को प्रसन्न किया जा सकता है। यह तिथि बहुत फलदायी है। इस अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन पितरों की आत्मा तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म आदि किए जाते हैं।

मार्गशीर्ष माह में अमावस्या के दिन भगवान श्री हरि की पूजा करना पुण्यदायक माना जाता है। इस माह भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का दिव्य ज्ञान दिया था, इस कारण मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन गीता का पाठ अवश्य करें। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन उपवास रख पितरों का तर्पण करें। उन्हें भोग लगाकर प्रार्थना करें। मान्यता है कि ऐसा करने से देवी देवता और ब्रह्मांड के पशु पक्षी भी तृप्त होते हैं। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान श्री हरि विष्णु के मंदिर में पीले त्रिकोण वाला झंडा अर्पित करें। ऐसा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। अमावस्या के दिन शिवालय में जाकर भगवान शिव का कच्चे दूध और दही से अभिषेक कर काले तिल अर्पित करें। यह दिन पितृदोष और कालसर्प दोष निवारण के लिए बहुत उत्तम माना गया है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा और पितरों के नाम का दान पुण्य करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पितरों को याद कर तर्पण और दान देने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितरों के नाम का घी का दीपक जलाएं और शाम के समय पितरों के नाम का दीपदान करें। संभव हो तो इस दिन व्रत रखें। पितरों के नाम का भोजन जरूरतमंदों को कराएं। इस दिन शनि मंदिर में जाकर तिल और तेल का दान करें। जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र दान करें। इस दिन चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा दें। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस तिथि पर व्रत रखने वालों को दिन में जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। 

इस आलेख में दी गईं जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। 
 

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