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इस मास में प्रत्येक तिथि है पर्व के समान, स्नान-दान का है विशेष महत्व

माघ मास की प्रत्येक तिथि को पर्व के समान माना जाता है। कहा जाता है कि इस माह जहां कहीं भी जल हो, वह गंगाजल के समान माना जाता है। माघ मास में तीर्थ स्नान के साथ दान का भी विशेष महत्व है। यह माह दान-पुण्य, धर्म-कर्म और त्याग का माह माना जाता है। मघा नक्षत्र के नाम पर इस माह का नाम माघ है। माघ माह में किए धार्मिक कार्यों से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। 

माघ माह में लोग प्रयागराज माघ मेले में एक माह का कल्पवास भी करते हैं। मान्यता है कि माघ माह में देवता पृथ्वी पर आते हैं और मनुष्य का रूप धारण कर प्रयाग में स्नान करते हैं। इस मास में प्रयाग में स्नान करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माघ मास में कम से कम एक बार पवित्र नदी में स्नान अवश्य करना चाहिए। माघ माह में षटतिला एकादशी आती है। इस दिन जल में तिल डालकर स्नान करने की परंपरा है। इस माह में शुक्ल पक्ष अष्टमी को भीमाष्टमी कहते हैं। इस दिन पितामह भीष्म ने सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर प्राण त्याग किया था। इस दिन स्नान-दान और पूजा-अर्चना करने से सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस माह कृष्ण पक्ष में मौनी अमावस्या भी आती है। इसमें पूरे दिन मौन धारण करने की परंपरा है। इसी माह बसंत पंचमी का त्योहार भी आता है। इस दिन विद्या, बुद्धि, ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। माघ माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अचला सप्तमी का व्रत रखा जाता है। इसे अचला भानू सप्तमी भी कहा जाता है। इसी माह माघी पूर्णिमा भी आती है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होकर पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करते हैं। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा में स्नान दान करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है। इस माह तिल का दान करना बहुत लाभकारी माना जाता है। माघ माह में प्रतिदिन गीता या रामायण का पाठ करें। ऐसा करने से मानसिक शांति प्राप्ति होती है।

इस आलेख में दी गईं जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि यह पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह लें।