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फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान श्री हरि को समर्पित विजया एकादशी का व्रत किया जाता है। यह व्रत भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत ही उत्तम फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि यह व्रत शत्रु के हर वार की काट है और इस व्रत का पालन करने से हर कार्य में विजय प्राप्त होती है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध से पहले विजया एकादशी का व्रत किया था और परिणाम स्वरूप उन्हें विजय प्राप्त हुई। एकादशी व्रत के प्रभाव से शुभ फलों में वृद्धि होती है। 

विजया एकादशी का व्रत का वर्णन पद्म पुराण और स्कन्द पुराण में किया गया है। विजया एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु की उपासना की जाती है। विजया एकादशी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि से भगवान श्री हरि की उपासना करें। भगवान श्री हरि को चंदन का लेप, तिल, फल, दीपक और धूप अर्पित करें। भगवान की उपासना कर श्रीविष्णु सहस्त्रनाम और नारायण स्तोत्र का पाठ करें। पूरे दिन व्रत करने के बाद रात्रि में भगवान श्री हरि का नाम जपते हुए जागरण करें। व्रत से पहले की रात्रि में सात्विक भोजन करें और रात्रि भोजन के बाद कुछ नहीं लेना चाहिए। व्रत का समापन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें विदा करें फिर भोजन करें। मान्यता है कि एकादशी व्रत करने से स्वर्ण दान, भूमि दान, अन्न दान और गोदान से अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

इस आलेख में दी गईं जानकारियां धार्मिक अस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। 

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