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संपूर्ण भारत में इस दिन मनाया जाता है कोई न कोई त्योहार, खालसा पंथ का हुआ आरंभ

भारत के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक बैसाखी का त्योहार उल्लास और उत्साह का प्रतीक है। बैसाखी शब्द की उत्पति वैशाख से हुई। संपूर्ण भारत में यह दिन त्योहारों का दिन होता है। इस दिन सभी राज्यों में कोई न कोई त्योहार होता है। बैसाखी त्योहार का इतिहास गुरु गोबिंद सिंह से जुड़ा हुआ है। बैसाखी की तारीख असम में ‘रोंगाली बिहू’, बंगाल में ‘नबा बरसा’, तमिलनाडु में पुथांडु और केरल में ‘पूरम विशु’ के रूप में जानी जाती है। कई स्थानों पर इस दिन मेलों का आयोजन होता है। 

बैसाखी त्योहार का धार्मिक महत्व 1699 में शुरू हुआ। गुरु गोबिंद सिंह जी ने इस दिन खालसा पंथ की शुरुआत की। यह त्योहार सिख नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन खालसा पंथ की नींव गुरु गोबिंद सिंह जी ने रखी थी। इस दिन को खालसा सिरजना दिवस नाम से भी जाना जाता है। 13 अप्रैल 1699 को दसवें गुरु गोविंद सिंहजी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को सिख धर्म के लोगों के लिए मार्गदर्शक बनाया। बैसाखी के दिन सिखों ने अपना उपनाम सिंह अपनाया। यह उपाधि गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम से ली गई है। इस दिन ही सूर्य मेष राशि में संक्रमण करते हैं अतः इसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है। बैसाखी के दिन किसान प्रकृति माता का धन्यवाद करते हुए नई फसल की पूजा करते हैं। 

इस आलेख में दी गईं जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।